मान दिया
तूने
आंखें भर आयी
हाथ न फैलाया
था कभी
पर तूने तो
जबरन मुट्ठी
खोल
हथेली भर दी
कहते हैं
प्रसन्न होने
से
दुआ निकलती
है
तो जरूर
निकली होगी
मेरे
अवचेतन मन से
और
तू नहा गया
होगा
जरूर
उस
प्रेम
में |
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