शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

एक प्रश्न पिताश्री से

पिताश्री !
जितना प्यार तुम्हें पुत्र पर है
उतना पुत्री पर रहता
तो
पुत्री का भविष्य
आज कुछ दूसरा होता
पुत्रियों के साक्षरता की संख्या न घटती
वे दासी न होतीं
काल गर्ल न बनतीं
रखैल न होतीं
और
कोई भी पुरुष
पत्नी की जरूरत के लिए
वर्षो क्वांरा न रहता
पिताश्री !
तुम तो दान कर
निज पुत्री का
तृप्त हो जाते हो
उसे भाग्य भरोसे छोड़ देते हो
उसकी समस्याओं से
मुंह मोड़ लेते हो
क्या तुमने कभी
अपनी पैतृक शान 
पुत्री को विरासत में दी
पुत्र की तरह ?
प्रश्न कर रही आज
हर स्वाभिमानी कर्मठ अभावग्रस्त पुत्री
निज पिताश्री से |

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