शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

डाल एक टुकड़ा स्वप्न का


08 January 2016
21:21

-इंदु बाला सिंह



डाल एक टुकड़ा स्वप्न का
आशा कूकरी के सामने
बढ़ जा आगे ......
आखिर कब तक तकेगा राह
यूं ही खड़ा खड़ा
जो न मिल पाया
उस पर अफ़सोस क्यूं ........
कितने मिलेंगे
कितने छूटेंगे
ओ नौजवान !
चलता रहा
तो
नित नये मिलेंगे साथी
रुका क्यूं
कदम तो उठा ............
जग से हारा तो
क्या हुआ
खुद से न हारना
खुद पे जिसने शासन किया
उसने सुना
जीवन का मधुर संगीत  |




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