सोमवार, 16 सितंबर 2024

सत्य



दीवारें और तुलसी का चौरा गवाही न दे दें 


इस भय से 


टिकठी 


सम्मान पूर्वक उठी  


दीवार और तुलसी का चौरा देखते रह गये 


तेरह दिन की ही तो बात थी ……


 फिर दीवारें रंग दी गयीं 


अलमारी पर नया पेंट चढ़ गया 


तुलसी को दिन में 


ख़्याल से पानी दिया जाने लगा 


और 


रात को दीया  जलने लगा 


दिन में सूरज  किरणे सब कुछ देख रही थीं 


सब कुछ देख रहीं थीं चन्द्र किरणें भी 


हवाओं को खबर मिल रही थी 


प्रकृति समझ रही थी ……


कभी न कभी स्वार्थ की गगरी फूट ही जायेगी ।



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