#इन्दु_बाला_सिंह
अतीत को पढ़ कर ही हम गढ़ते हैं भविष्य
और
रचते हैं अपना वर्तमान
अपना सुघड़ समाज
आज हम लौट रहे हैं पूर्वजों की सभ्यता को समझने
हमारी माया सभ्यता का सूर्य ग्रहण का गणन
हमें अचंभे में डाल देता है
जीवन संध्या हमें याद दिलाती है
हमारे अतीत की ......
अतीत से भागती नयी पौध
जड़ों से दूर
नकली सूर्य की चकाचौंध से सम्मोहित हो
भागती ही रह जाती है
वर्तमान उसका उसे एक दिन थका ही देता है
केवल पैसा
और
अपने जीवन का अफसोस ही रहता है
उसकी मुट्ठी में
अपनी आनेवाली पीढ़ी को थमाने के लिये ।
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