रविवार, 22 सितंबर 2024

कृतियों का जन्म





#इन्दु_बाला_सिंह


इंसान में 


विचार और भावनायें एक साथ चलते रहते हैं 


कभी कभी भावनाओं का वेग तीव्र हो जाता है 


पहाड़ फोड़ कर निकल पड़तीं है शब्दों के झरने सरीखी 


कविता का जन्म होता है  


स्थिर भावनायें रिसतीं रहतीं  हैं 


शब्दों का जलकुंड बनता है उपन्यास का जन्म होता है 


भावनाओं के हल्के फुलके शाब्दिक उफान कथा कहानी के रूप ले 


बस जाते हैं ……


सोंच विचार कर किया गया भावनायुक्त 


परीक्षण वैज्ञानिक लेख …विश्लेषण राजनीतिक लेख के रूप में जन्म लेता है ।



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