#इन्दु_बाला_सिंह
ब्याह के बाद
धीरे सीख रही है युवती
दूसरे घर का चाल ढाल
और
भुला रही है अपने बचपन के गुण
जीने के लिये
वह दूसरे के साँचे में ढल रही है
युवती की प्रतिभा को मान न मिला
दोनों परिवार एक दूसरे से कुछ न सीखे
लड़की अपने शौक़ खो रही है
दरवाज़े ख़ामोश हैं
नया जीव जन्म ले रहा है
धीरे धीरे
नयी पौध कुम्हला रही है
उदास धूप में
ठंडी हवाओं में ।
04/08/24
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