रविवार, 22 सितंबर 2024

लंबी आयु का दुःख





#इन्दु_बाला_सिंह


एक कोने में पड़ी अकेली बूढ़ी औरत शादी के गीत गाती है 


अपनी युवावस्था के विवाह रस्मों को याद करती है 


फिर 


विव्ह्वल हो  पुकार उठती है 


ओ माँ !


बेटे आ कर देख जाते हैं माँ को 


लोक लाज के चलते 


यह वही औरत है 


जिसने  अपनी जवानी में बेटे बेटी के दुःख दूर किये 


आज पड़ी है वह 


बिस्तर पर 


कभी बाथरूम में गिर जाती है 


तो कोई उसे उठा देता है आ कर 


बुढ़ौती रिश्तों की 


महक ढूँढती है 


सहारा ढूँढती है 


प्यार ढूँढती है 


सम्मान ढूढ़ती है ……


आख़िर इतनी आयु क्यों जीता है इंसान ?



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