My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
#इन्दु_बाला_सिंह
बह गया आँखों से जो
वो जज्बात कैसा
गिर गया आँखों से
वो इंसान कैसा
बाक़ी सब तो
कुछ पल का समझौता है
पानी का बुलबुला है इंसान
फिर अहंकार कैसा
वह गर्मी कैसी
जो न तो अपने काम आयी और न ही किसी ज़रूरतमंद के ।
#indubalasingh #hindipoetry
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें