रविवार, 22 सितंबर 2024

गर्मी





#इन्दु_बाला_सिंह


बह गया आँखों से जो 


वो जज्बात कैसा 


गिर गया आँखों से 


वो इंसान कैसा 


बाक़ी सब तो 


कुछ पल का समझौता है 


पानी का बुलबुला है इंसान 


फिर अहंकार कैसा 


वह गर्मी कैसी 


जो न तो अपने काम आयी और न ही किसी ज़रूरतमंद के ।


#indubalasingh #hindipoetry

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