24 March
2015
23:31
-इंदु बाला
सिंह
कुछ मन बड़े
कमीने होते हैं
अपनी ही
बुद्धि की बात नहीं सुनते हैं
बस
नैतिकता के
पानी पर लिखते रहते हैं
ठोकर खाते
रहते हैं
गिरते
उठते .....बस बढ़ते ही रहते हैं
ये
अजूबे से ......अकेले ही रहते हैं
अपने पड़ोसी के
सिरदर्द बने रहते हैं |
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