सोमवार, 16 मार्च 2015

यह कैसी बुद्धिमानी है !


17 March 2015
09:30

-इंदु बाला सिंह


जब पटती नहीं
तो अलग राह क्यों चुन लें हम
गले पड़े रह
फंदा बन जाना
संबंधो की सलीब पर क्यों चढ़ें हम
एक दुसरे से छुटकारा पाने का नित नया तरीका ढूंढना
कैसा लोकलाज है !
यह कैसी बुद्धिमानी है !

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