17 March
2015
09:30
-इंदु बाला सिंह
जब पटती नहीं
तो अलग राह क्यों न चुन लें हम
गले पड़े रह
फंदा बन जाना
संबंधो की सलीब पर क्यों चढ़ें हम
एक दुसरे से छुटकारा पाने का नित नया तरीका ढूंढना
कैसा लोकलाज है !
यह कैसी बुद्धिमानी है !
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