गुरुवार, 19 मार्च 2015

सम्वेदना की पहचान


20 March 2015
07:15


-इंदु बाला सिंह


वह देखो ........

वह


अरे ! सामने देखो

नहीं दिखा !

क्या यार !

लड़खड़ा रहा है वह

अरे देखो !

गिर गया है वह

तुम्हें दिखायी नहीं देता !

गजब हो यार !

अब देखो उठ गया है वह

फिर चल रहा है वह

अरे ! देखो सड़क पर खून की धारी दिख रही है

अपने सहयात्री के अनर्गल प्रलाप से परेशान हो उठा मित्र

दुसरे दिन से

मित्र ने


नया सहयात्री ढूंढ लिया

और

नयी सड़क पकड़ ली |



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