रविवार, 22 मार्च 2015

तेरा पिता तुझे ढूंढें


23 March 2015
07:26

-इंदु बाला सिंह

क्रांति !
तुझे देखा था मैंने अपने पड़ोस में
पर
आजकल तू दिखती नहीं
कहां रहती है तू
बड़े फेर में हूं
तेरा पिता 
आज
तुझे  तेरा हक देने को व्याकुल है
वह तुझे ढूंढ  रहा है |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें