सोमवार, 30 मार्च 2015

दूर न जाना


31 March 2015
08:17


-इंदु बाला सिंह


भूल कर भी न जाना
इतनी दूर
अपनों से तू
कि
टूट जाये स्नेह के धागे से बुनी हुयी
विश्वास की डोरी
ओ युवा !
क्योंकि इस जग में
जन्मदाता से बड़ा
कोई मित्र नहीं
हितैषी नहीं |

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