30 March
2015
11:09
-इंदु बाला
सिंह
पुस्तकें
पढ़ पढ़ हुये
हम
तो अकेले ........
पढ़ते गये
पल कटते रहे
पर
प्यास
मिटी नहीं ...............
और
हम आजीवन
पुस्तकों के
संग सोते जागते
न
जाने क्या तलाशते रहे ...........
आकाश ताकते
रहे
प्यासे
के प्यासे रहे |
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