25
November 2014
15:39
-इंदु बाला
सिंह
समय
ऐसा भी बदलता है यारो !
छोटा भाई भी
बन जाता है
जेठ
सामने से
गुजरना भी गुनाह हो जाता है
सहिष्णुता की
परीक्षा होती रहती है
जितने कम हो
जांय पैतृक सम्पत्ति के हकदार
उतना ही भला
हो जाता है
हर सहोदर का |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें