सोमवार, 16 मार्च 2015

जीत की पताका फहराना बाकी है |


23 November 2014
22:11
-इंदु बाला सिंह


कितने ही
मौसम आये
और
कितने ही चले गये
अब
घबराना कैसा
सांझ भई तो क्या हुआ
अभी सांस बाकी है
आस बाकी है
रात बाकी है
जीत की पताका फहराना बाकी है |

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