बुधवार, 18 मार्च 2015

भूलना चाहती हूं मैं


18 March 2015
12:51
-इंदु बाला सिंह


क्यों दिखाया तुमने कथित अपनों को
वह घर
वह शान
आज की उनकी पहचान
अपनों की वह शौकत
जिसकी नींव पड़ी थी मेरे अपने के श्रम से ........
ओ फेसबुक !............
धन हजम
जन हजम
इंश्योरेंश गुम ......
मैं तो भली थी
अकेली ही चल रही थी
पर
अब भूलना चाहती हूं मैं
आज उन सभी को |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें