12:42 pm
02/07/20
-इन्दु बाला सिंह
राजाओं को उपहार में दास और दासियाँ दी जाती थीं
मानों दास , दासियाँ खूबसूरत वस्तुएँ हों
गजब काल था वह........
आज गरीब की बेटियाँ बेची जाती हैं
भले घर में पिता -माता द्वारा बेटियाँ दान की जाती हैं
आज भी बेटियाँ सामान हैं ........
बेटियों में जागरण क्यों नहीं ?
बेटियों से एक सवाल है -
“ क्या वे सामान बने रह कर खुश हैं ? “
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