- इंदू बाला सिंह
दुनिया की टेक्नोलोजी तेज़ी से बदल रही है
और
अपनी स्पीड बढ़ा रहे हैं युवा उसे पकड़ने के लिये। युवा .....
युवा की दौड़ से सैकड़ों गुना स्पीड से दौड़ रही है आज ये टेक्नोलोजी
रिले रेस सरीखी ...... यह हर सैकड़े मील पर .... अपना कुछ सोफ्टवेयर रख आगे दौड़ जाती यह ......
ग़ज़ब की ख़ूबसूरत और संजीवनी बूटी सी जीवनीदायक है टेक्नोलाजी .....
हतप्रभ युवा फिर शूरू कर देता है अपनी दौड़ ........ अपनी मनभावन टेक्नोलोजी के पीछे
और
माता - पिता परेशान हैं .... दुखी हैं .... अपनी संतान को इस तरह तनाव में दौड़ते देख
आख़िर ये बच्चे रुकना क्यों नहीं चाहते !
प्रश्न करने से वे कह उठते हैं वे युवाओं से ..... आख़िर क्यों इतनी दौड़ ? ..... कहीं तो रुक जाना चाहिये !
अपना उत्तर हमें वे बड़े सहज ढंग से दे देते हैं .....अंकल आप आप क्या जानें इस टेक्नोलोजी का महत्व .....
सही बात है ..... हमारे समय न तो ऐसी टेक्नोलोजी थी और न ही विदेश का महत्व
अरे हमारे समय बेटा शहर कमाने जाता था ..... तो हम कहते थे हमारा विदेशिया हो गया है
और गाँव वह चार पांच साल में लौटता था .......
लोग कहते हैं .....ग्लोबल विलेज का जमाना आ गया है अब
हम निराकार ईश्वर के समर्थक हो रहे हैं ..... और हमारे बच्चे साकार ईश्वर में अपने मन की शांति ढूँढ थे हैं
आख़िर यह कैसा परिवर्तन हैं ?
मन में एक प्रश्न उठ रहा है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें