-इन्दु बाला सिंह
जेब खाली है
हंस ले न यार ......
कोरोना ने बंद कर दिया है घर में
हंस ले न यार ......
राशन नहीं है घर में
हंस ले न यार ......
अब बच्चे मान नहीं देते
हंस ले न यार .......
और एक दिन वह गुजर गया
मित्रों , रिश्तेदारों की जबान पर एक ही वाक्य था .....
बड़ी खुशहाल ज़िंदगी जिया वह ।
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