बुधवार, 15 जुलाई 2020

प्रवासी

- इन्दु बाला सिंह
लॉक डाउन हो गया
अरे ! फ़ैक्टरी लॉक हो गयी
रेल लॉक हो गयी
बसें लॉक हो गयीं
पर पेट न लॉक हुआ .....
अपने याद आने लगे
गाँव याद आया
मुहल्ले की सड़कें याद आयीं .....
कोरोना तूने सभी बिछड़े पल याद दिला दिए ....
अब रोशनी की चाह नहीं
सब प्रवासी मज़दूर अपने गाँव की ओर बढ़े
मुझे बंगाल का अकाल याद आने लगा ......
कोरोना ने धीरे धीरे पैर पसारा
प्लेन बंद हुये
कंपनीं में छँटनीं होने लगी
कैम्पस प्लेसमेंट में मिली नौकरियाँ ख़त्म हो गयीं
बैंकों से लोन ले के पढ़ें विद्यार्थी घबड़ा गये
आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा ....

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