अब न जाऊँगा
मैं
रोजी रोटी के लिये कभी भी विदेश ....
अपना देश भला
यहीं कमाऊँगा
मिल बाँट के खाऊँगा ......
कोरोना से भी न सीखा
तो क्या खाक सीखा मैंने .....
मिट्टी में मिले
शहर की जगमग .....
अपनी देहरी क्या छूये
स्वर्गानुभूति मिली
हमें .....
समय ने आइना दिखाया ।
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