-इंदु बाला सिंह
जूते जरूरत होते हैं .....
पर जूते शौक भी होते हैं इतनी समझ न थी उसमें
जिस दिन उसे बेटे से स्पोर्ट शू उपहार में मिला उस दिन वह भौंचक रह गयी ....
और
कुछ दिन बाद उसे समझ आया
ये रिबॉक के शूज मात्र जूते नहीं थे
ये उसकी आजादी के परिचायक थे
ये जूते उसे बार बार कहते थे ... दौड़ ... दौड़ .. दौड़ने की उम्र नहीं होती ....
जूतों की आवाज सुन न जाने क्यों .... वह हर बार सहम सी जाती थी |
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