शनिवार, 6 अप्रैल 2013

छोटी कविताएँ - 19



मुक्त कर दो 

उड़ा दो
आज पिंजरे के पंछी को
तुझसे मोह रहेगा तो
आयेगा हर सुबह
तेरे छत पर
मुक्ति के गीत गायेगा  |




लुप्तप्राय सम्बन्ध 


लुप्तप्राय हो गये
रिश्ते उनके
जो बदल पाए
खुद को
समय के साथ |

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