अपना
बेटा जब विदेश गया बसने
बड़ा दुखी हुआ
वह
और उसी समय
उसके मस्तिष्क में कौंधा
अपने किसान
पिता का चेहरा
कितना भावहीन
थे वे
जब वह अपनी
पत्नी के साथ गाँव से निकला था
शहर में अपनी
गृहस्थी बसाने
गाँव के लिए
तो शहर ही विदेश था न !
उसने एक गहरी
सांस ली
उसका बुढ़ापा
तो सविधाओं के बीच कटेगा
पर उसके पिता
ने तो अभावों से ही जी लगा लिया था |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें