प्रथम पुरुष
पिता
तूने मुझे
गट्ठर बना दान किया
द्वितीय
पुरुष को
नाम कमाया
पर द्वितीय
पुरुष से लूट लिया गट्ठर को तृतीय पुरुष ने
आज वह गट्ठर
लुट गया है
मैं
खड़ी हूं बाजार में
बेच रही हूं
अपनी चादर के टुकड़े
पेट भी तो
भरना है न |
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