बुधवार, 2 अप्रैल 2014

पकड़ में न आऊं मैं


एक गाय पर
डाल फंदा
नायिलन  के मोटे तार से
चार पुरुष
खींच रहे थे
अद्भुत नजर था
कौतुहल भरे मेरे नेत्र देख रहे थे
नवरात्रि के त्यौहार में
गाय को पकड़ने का दृश्य .....
तभी
दिखी मुझे
थोड़ी दूरी में खडी एक मिनी ट्रक
जिसमे में दो गायें लदी  थीं
इधर
फंदे में फंसी गाय
उछली कूदी
पर निकल न पायी तार के फंदे से
चारों पुरुष
खींच कर लाये गाय को
ट्रक का पिछला हिस्सा खुला
प्लाई का पट्टा गिरा
अब
इस पर से
चढना था गाय को ट्रक में ......
पहले दो पुरुष चढ़े
ट्रक पर
खींच खींच हारे
गाय को उपर
पर
बैठ गयी
वह फंदे में फंसी गाय
प्लाई के पास ही ......
उपर से खींचा गया
गाय को रस्सी से
नीचे पूंछ उमेठी गयी गाय की
पर अड़ गयी
वह गाय
हिली न डुली अपने स्थान से
पल भर को लगा मुझे
अरे !
उफ्फ !
खींची जा रही थी गाय
और
उसकी मजबूरी की
मैं
दर्शक थी
दस मिनट चला यह दृश्य
कितनी कारें
गुजर गयीं बगल से
हार कर
छोड़ दिया
उन कांजीहाउस के कर्मचारियों ने
उस जिद्दी गाय को
और दो पकड़ी गयी गायों के साथ
स्टार्ट हुयी
वह कांजीहाउस की मिनी ट्रक
पर
उससे पहले
मेरे सामने से भागती हुयी गुजर गयी
वह बहादुर गाय
मैंने देखा उसे पास से
आश्चर्य से
उस
बहादुर जानवर को
उस
शक्ति के प्रतीक को
उफ्फ !
वह गाभिन थी |









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