रविवार, 6 अप्रैल 2014

पुत्र प्रेम


कहते हैं माँ
तो
माँ ही होती है
पर एक समय
ऐसा भी आ जाता है
जब
माँ
माँ नहीं मित्र बन जाती है
और
अपनी ही पुत्री से
इर्ष्या करने लगती है
उसके अर्जित धन की लुटेरी
बन
पुत्र के नाम
अपने धन जमीन की वसीयत लिख जाती है
सोंच में हूं
ऐसी माँ को किस नाम का
सम्बोधन दूं |


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