कहते हैं माँ
तो
माँ ही होती
है
पर एक समय
ऐसा भी आ
जाता है
जब
माँ
माँ नहीं
मित्र बन जाती है
और
अपनी ही
पुत्री से
इर्ष्या करने
लगती है
उसके अर्जित
धन की लुटेरी
बन
पुत्र के नाम
अपने धन जमीन
की वसीयत लिख जाती है
सोंच में हूं
ऐसी माँ को
किस नाम का
सम्बोधन
दूं |
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