26 April
2014
06:30
-इंदु बाला सिंह
आंख के तारे
होते हैं
अपने सपने
जीवन - संध्या
के सहारे
जो
कभी न गायब
होते
जन्मदाता
की नींद से ........
श्रद्धा
सुमन न चाहें
वे ......
हम उनकी नियति
देखें
जो
आजीवन तरसें
परदेसी सन्तति
के साथ के लिए .....
सपने ही तो
सदा के सहारे
उनके
वे
स्वप्न में
खेलते अपनी सन्तान से
दौड़ते
सन्तति को
बचाते
उसके दुश्मन
से ..........
सपने होते
कितने प्यारे
हर बुजुर्ग के
सहारे
जो
उसका साथ
उसके चिर
निद्रा की गोद में
जाने तक
देते |
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