मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

खोना न चाहूं तुम्हें


तुम्हारे
अनर्गल
गलत तर्क
के 
प्रत्युत्तर दे
मैंने
तुम्हें खोना न चाहा .........
और
इसी का फायदा उठा
तुम आजीवन बढ़ते रहे
जिस दिन तुम्हे अपनी गलती का
अहसास होगा
उस दिन
बहुत ही देर हो चुकी होगी .......
पर
मुझे तो
सदा ही खुशी रहेगी
कि
मैंने
आजीवन
तुम्हें खोया नहीं |

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