बुधवार, 2 अप्रैल 2014

तीसरे दर्जे की नागरिक


घर की
तीसरे दर्जे की नागरिक
पति की अनुगामिनी
पुत्र के सुख में
आजीवन अपना सुख तलाशती
स्त्री
अनजाने में
दे ही जाती है
अपने संस्कार की वसीयत
अपनी पुत्री को
और
वह नवयुग की पुत्री
पढ़ लिख कर
आर्थिक रूप से
आत्मनिर्भर रह कर भी
बनी रहती है
अपने घर में तीसरे दर्जे नागरिक |

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