रविवार, 6 अप्रैल 2014

महाभारत क्यों


संस्कार की दुहाई
है कितनी प्यारी राजनीति
मोहक नशीली भूख मिटानेवाली
पर 
कल्पना सिहरा देती है
महाभारत के पश्चात्
अंगड़ाई ले उठी
उस
रक्तिम भोर की
चरों ओर श्मशान सा सन्नाटा है 
बुद्धिजीवी
खामोश सिर झुकाए चले जा रहे हैं ........
धीरे धीरे अंधकार गहरा रहा है |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें