स्त्री
जिस दिन
सर्वहारा बन जायेगी
उस दिन
उसकी
आंखों से
प्यार की
खुशबू नहीं
आग की चिंगारी
छिटकेगी
बहुत छला
तुमने
माँ कह कर
अब और नहीं
सदा उसे
किसी की बहन
या
पत्नी कहा
उसके अपने
वजूद को
मानवी समझ
सहा नहीं
मान दिया नहीं
तूने |
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