रविवार, 6 अप्रैल 2014

ईश्वरीय अहसास


अष्टमी के दिन
एक पीली साड़ी को मोड़
एक स्त्री आकृति बना
सूर्योदय से पूर्व
नमस्कार करती थी
घर की अर्धांगिनी
तब
पल भर को
इश्वर की कण कण में उपस्थिति
का भान होने लगता था
पत्थर की मूरत टूटे
पर
मन की मूरत
कैसे तोड़े
तू |

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