शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

जय हो तेरी






- इंदु बाला सिंह


मेरे रुदन पर 
बही तेरी कविता
श्रोता मिले तुझे
वाह वाह बोले ...
आह किये ...
मेरे दुःख पर
छापी कथा तूने
पाठक मिले तुझे
वे दीर्घ निःस्वास लिए
टाइम पास किये ..
पर मेरी आह से निकली जब चिंगारी
और
हाथ में उठी तलवार
तो
तू न फटका पास मेरे ...
मुंह फेर मौन हो
भूला तू मेरा अस्तित्व तू भूल चला
जय हो
लेखक तेरी 

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