तेज
आंधी हमें समझाती है
घास सा सो
जाना
तने रहे जो
वृक्ष सा अकड़े
रहे जो
धराशायी हुए
वे
सुनामी समझाती
है हमें
हाथियों सा
सूंघना
भाग कर
सुरक्षित ऊँचे स्थल पर चढ़ जाना
आज हम सोंचें
समझें
एक पल रुकें
मान ही लें
इन प्राकृतिक
आपदाओं को गुरु
समस्याओं के
धक्के से हम घबराएं न
कुछ दूर बाएं
मुड़ें और चलें
भीड़ तो गुजर
ही जायेगी
पुनः आगे दौड़
पड़ें
पूरे जोश से
होश से |
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