नैतिकता भटक
रही
पहाड़ों में
घाटियों में
कोई नहीं
रखता उसे अब
अपने घर में
एक दिन एक
बालक ने कहा उससे
जब मैं बड़ा
होऊंगा
अपना घर बनाऊंगा
तब रखूंगा
उसमें तुझे
ओ मेरी
प्यारी दोस्त
नैतिकता
मुस्करा कर
बालक के सर
पर हाथ फेर कर
आगे
बढ़ चली |
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