06 June
2014
09:37
-इंदु बाला
सिंह
वह
आजीवन
दूसरों के लिए
साँस लेता रहा
उनकी सहायता
करता रहा ..........
ये कैसी सोंच
थी उसकी !
कि
उसका अपना घर
सूना रहा
उसके आने की
बाट
जोहता रहा
और
उसकी
उपस्थिति के
लिए
तरसता रहा |
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