- इंदुबाला सिंह
टूटा सम्बन्ध। .....
कोई तो कारण था होगा उसके टूटने का .....
बढ़ चले थे हम
अब पीछे क्या मुड़ना ....
नयी राह ....
नये रिश्ते ....
नये अनुभव .....
चलने के लिये कभी न कम पड़ेगी जमीं
भले समय कम पड़ जाय ...
समय को सिक्कों में बदल कर रखा है मैंने
एक एक सिक्का खर्च करना है
जब तक सिक्का हाथ में
तब तक दुनिया जेब में ।
बढ़ चले थे हम
अब पीछे क्या मुड़ना ....
नयी राह ....
नये रिश्ते ....
नये अनुभव .....
चलने के लिये कभी न कम पड़ेगी जमीं
भले समय कम पड़ जाय ...
समय को सिक्कों में बदल कर रखा है मैंने
एक एक सिक्का खर्च करना है
जब तक सिक्का हाथ में
तब तक दुनिया जेब में ।
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