- इंदु बाला सिंह
वह गुजरी
बड़ी जल्दी कमरा खाली हो गया उसका ...…
कुछ कीमती सामान तो था नहीं उसके पास
वह
गांव के विशाल मकान की मालकिन
अनपढ़ वृद्धा
अपने अफसर बेटे-बहू की जिंदगी में एक खूबसूरत कालीन के पैबन्द सरीखी थी घर में ...…
तरसते बीत रही थी उसकी जीवन सन्ध्या किसी से बात करने की चाह में ...…
और
एक दिन मुक्ति मिल गयी उसे ...…
अपने उच्चपदस्थ बेटे बहू के कंक्रीट के जंगलों से ..…
जोर की छलांग लगाते ही कभी कभी जनरेशन गैप बहुत ज्यादा हो जाता है ...…
वैसे कहानी पुरुष्कार योग्य बन जाती है ।
कुछ कीमती सामान तो था नहीं उसके पास
वह
गांव के विशाल मकान की मालकिन
अनपढ़ वृद्धा
अपने अफसर बेटे-बहू की जिंदगी में एक खूबसूरत कालीन के पैबन्द सरीखी थी घर में ...…
तरसते बीत रही थी उसकी जीवन सन्ध्या किसी से बात करने की चाह में ...…
और
एक दिन मुक्ति मिल गयी उसे ...…
अपने उच्चपदस्थ बेटे बहू के कंक्रीट के जंगलों से ..…
जोर की छलांग लगाते ही कभी कभी जनरेशन गैप बहुत ज्यादा हो जाता है ...…
वैसे कहानी पुरुष्कार योग्य बन जाती है ।
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