- इंदु बाला सिंह
ननिहाल में रक्तसम्बन्धी मामा लोग हैं
मामा के मित्र भी तो मामा ही हुये न
नन्ही की माँ , नानी मुहल्ले के पुरुषों से पहचनवा रहे हैं उसे
वह सीख रही है मनुहार करना अपने मामाओं का
वह मामाओं की मुस्कान से खुश हो जाती है ।
मामा लोग नन्ही को घुमाने ले जाते हैं पार्क , दुकान .……
नयी जगहें , चमकदार दुकान देख नन्ही प्रसन्न है
उसके पापा को तो अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलती
…………….…………….………
दादा का घर भी बहुत भाता है नन्ही को
ढेर सारे चाचा हैं वहां
वे उसे सड़कों पर बिकनेवाली अच्छी अच्छी मजेदार चीजें खिलाते हैं
नन्ही की माँ भी खुश रहती है
जब तक नन्ही घर से बाहर रहती है उसे गप्पें मारने का समय मिल जाता है ।
नन्ही बड़ी हो रही है
वह सुरक्षित घेरे में है
नन्ही की मां निश्चिंत है
नन्ही को मित्रों की कमी नहीं महसूस होती
अपने और मुहल्ले के चाचा , मामा के साथ खुश है ।
नन्ही बड़ी हो रही है ।
मामा के मित्र भी तो मामा ही हुये न
नन्ही की माँ , नानी मुहल्ले के पुरुषों से पहचनवा रहे हैं उसे
वह सीख रही है मनुहार करना अपने मामाओं का
वह मामाओं की मुस्कान से खुश हो जाती है ।
मामा लोग नन्ही को घुमाने ले जाते हैं पार्क , दुकान .……
नयी जगहें , चमकदार दुकान देख नन्ही प्रसन्न है
उसके पापा को तो अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलती
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दादा का घर भी बहुत भाता है नन्ही को
ढेर सारे चाचा हैं वहां
वे उसे सड़कों पर बिकनेवाली अच्छी अच्छी मजेदार चीजें खिलाते हैं
नन्ही की माँ भी खुश रहती है
जब तक नन्ही घर से बाहर रहती है उसे गप्पें मारने का समय मिल जाता है ।
नन्ही बड़ी हो रही है
वह सुरक्षित घेरे में है
नन्ही की मां निश्चिंत है
नन्ही को मित्रों की कमी नहीं महसूस होती
अपने और मुहल्ले के चाचा , मामा के साथ खुश है ।
नन्ही बड़ी हो रही है ।
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