गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

सहिष्णुता के पीछे


- इंदु बाला सिंह


किसी को क्या पता सड़क में चलनेवाला

अपने कमरे में कितनी बार लड़खड़ाया था ....

सहिष्णु दिखनेवाला

अकेले में कितनी बार रोया था ...

अकेलेपन का भरापन

उस अकेले से पूछो ....

जो बुखार में अपनों के स्पर्श के लिये तरसा होगा ।

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