सोमवार, 29 जून 2015

सूरज का कोप


30 June 2015
07:44

-इंदु बाला सिंह

सूरज के कोप से कुम्हलाई धरती देख
रात में रो पड़ा  बादल
नदी बौखला गयी ..................
सुबह
चकित सूरज ने देखा
यह विध्वंश .....................
सूरजमुखी गुम गयी थी
छतों पर नाचनेवाले मोर अदृश्य थे
मुंडेरों पर गिद्ध बैठे थे |

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