Sunday, June 21, 2015
-इंदु बाला सिंह
जीवन की राह
कभी कभी इतनी उबड़ खाबड़ होती है
कि
स्वप्न में भी कल्पना करना
दुरूह होता है
हमारे लिये
और हमारी सारी शक्ति लग जाती है फलांगने में
राह की बाधाएं |
कभी कभी इतनी उबड़ खाबड़ होती है
कि
स्वप्न में भी कल्पना करना
दुरूह होता है
हमारे लिये
और हमारी सारी शक्ति लग जाती है फलांगने में
राह की बाधाएं |
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