सोमवार, 29 जून 2015

स्कूल की लाईब्रेरी


29 June 2015
22:23

-इंदु बाला सिंह


याद आती है
कभी कभी अपने स्कूल के लाइब्रेरी की
जिसने चटवा दिया था
मुझे
रवीन्द्र नाथ टैगोर , बंकिम चन्द्र चैटर्जी , प्रेमचन्द , यशपाल जैन के साहित्य को
और
अब आँखों के सामने हैं
आज के स्कूल
उसकी हिन्दी साहित्य से अछूती लाइब्रेरी
हिन्दी साहित्य से हैं अछूते छात्रगण
अब किसे दोष दूं
समझ न आये मुझे |

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