28 June
2015
15:27
-इंदु बाला
सिंह
अभावग्रस्त
की भूख
रेगिस्तान है
आये दिन
इस
में रेत की आंधियां चलती हैं |
यहां
भक्ति के फूल
नहीं खिलते .......
प्रेम की
खुशबू नहीं उड़ती .......
यहाँ तो खिलते
हैं
केवल
भूख के फूल |
हर अभावग्रस्त
को
इन्तजार है
अपने
स्वप्निल
बरसात का |
वह भूखा है
उसे छेड़ना मत
आज भी इन्तजार
कर रहा है वह
मिट्टी की उस
सोंधी महक का
जिसके बारे
में
उसने
अपनी लोककथाओं
में सुना था |
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