रविवार, 21 जून 2015

आंखें हंसती हैं


22 June 2015
10:46

-इंदु बाला सिंह


न जाने क्यूं
कभी कभी मन रोता है
और आंखें हंसती हैं
न जाने 
ये किसे चिढ़ाती हैं |

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