17 June
2015
07:07
-इंदु बाला
सिंह
अच्छा हुआ
चली गयी
अपने आप
ब्याह कर ली
वर्ना वो भी
बैठी रहती
इसी घर में
अपनी दोनों बहनों की तरह
अपनी
नतिनी निकले के लिये उस उम्रदार महिला के मुंह से ये वचन सुनकर वह सोंची ........
वाह रे
बुजुर्ग !
गांठ का पैसा
बांधा तूने किसके लिये
जब घर की
बिटिया के लिये तेरे घर में अन्न नहीं
तो तेरा
प्रतिदिन का
देवी पूजन व्यर्थ है |
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