शुक्रवार, 5 जून 2015

नशा न करना


05 June 2015
16:21

-इन्दु बाला सिंह

सब नशों से गहरा नशा प्रेम का
न करना तू प्रेम किसीसे
सुन ले
ओ रे चेतन मन !
कर्म के रेगिस्तान में तपता जा तू
चलता जा तू
एक दिन कुंदन बन जायेगा निखर कर तू 
बस
मौन नपे कदमों से बढ़ता जा तू |

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